जन्मदिन है तुम्हारा क्या तुम्हें उपहार दूँ
गुलाबों के झाड़ दूँ कि मोतियों के हार दूँ
गाड़ियों में कार दूँ या झोलियों में प्यार दूँ
सारी खुशियाँ वार दूँ, क्या तुझे मैं यार दूँ
जन्मदिन है तुम्हारा क्या तुम्हें उपहार दूँ

इस तकनीकी युग में जी चाहे एक तार दूँ
फिर सोचता हूँ पहले मिसकॉल ही मार दूँ
चुराकर दुनिया से खुशियाँ तुझे हजार दूँ
इस शुभ अवसर पर आजा लार-दुलार दूँ
ये लार दूँ दुलार दूँ ला नजरें तेरी उतार दूँ
ये देख यशोदा बोली थोड़ा और संवार दूँ
जन्मदिन है तुम्हारा क्या तुम्हें उपहार दूँ
तू नहीं है वो जिसे मैं उपहार में शृंगार दूँ
तू नहीं है वो जिसे शृंगार की झंकार दूँ
तू नहीं है वो जिसे उपकार का आभार दूँ
तू नहीं है वो जिसे आभार का भी भार दूँ
तू नहीं है वो जिसे भार में ये सरकार दूँ
तू नहीं है वो जिसे मेरी सरकार बेकार दूँ
तू ही है वो जिसे मेरी हृदय का संसार दूँ
जन्मदिन है तुम्हारा क्या तुम्हें उपहार दूँ ।
