गरीब कौन

एक दिन विचार करते हुए 

और स्वयं से लड़ते हुए 

यह प्रश्न आया मन में 

कि गरीब कौन है?

उत्तर खोजने निकला तो 

समाज में क्या देखता हूँ-

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी

जो समर्थ है हर तरह से 

झूठी असमर्थता दिखाकर 

सरकार से मुआवजा लेता है 

बाढ़ का, सूखे का, फसल का

देखते हुए आगे बढ़ता हूँ 

एक निठल्ला बेरोजगार है

उसको स्वयं कार्य नहीं करना 

लेकिन आय होनी चाहिए 

शौचालय के नाम पर 

तस्वीर भेजकर पाए मुआवजे से 

उसने अलमारी, सोफ़े खरीदे

एक चतुर किसान से मिलिए 

गेंहू फसल की कटनी कराए 

कुछ पके कुछ कच्चे दाने 

दोंनो मिलाकर भर दिए बोरे 

उनका विचार है इससे वजन बढ़ेगा

कच्चे दाने सड़े-गले व्यापारी के 

कुछ मालदार सेठ भी मिले

समाज में प्रतिष्ठित, सम्मानित 

जो बहुधा सबको ऋण देते हैं

क्योंकि अधिक है उनके पास 

किंतु स्वयं के बच्चे के लिए 

छात्रवृत्ति से फायदा लेते हैं

कुछ लोग तो ऐसे भी मिले
जो बस वास्तव में ही जवान हैं 

कागज़ों पर उनकी उम्र

मानो योजनानुसार परिवर्तित होती है 

वृद्धा पेंशन योजना के लिए 

स्वयं को वृद्ध घोषित कर लें 
आगे बढ़ा तो एक और रंग देखा 

अब सुना हाथकरघा के लिए 

सरकार ने मुआवजा घोषित किया 

तो लोगों ने बस लाभ हेतु

सस्ते हथकरघे खरीदे भले कार्य न आए 

आखिर नेता, सत्ता और सरकारें 

यही जनता बनाती है मुर्ख थोड़ी है 

सही बात है भाई ये तो 

सरकारी योजना का लाभ

सबको मिलना चाहिए 

वैसे भी उपलब्ध है तो 

अवसर क्यों छोड़ना

सक्षम सहसा अयोग्य हो जाए 

इतना भी अविश्वसनीय नहीं है