बाढ़ में बिहार

बाढ़ में बिहार

देखो सो रही सरकार

देखो सो रही सरकार

जनता का हर साल

यहां रहता है बेहाल

दोषी नहीं कहते

फिर भी कारण है नेपाल

जो छोड़ता है कोसी,

गंडक नदी का पानी

जिसका पानी आ हर साल

रचता एक नई कहानी

यहां मेट्रो का सपना

हमको लगता है बेकार

देखो सो रही सरकार

देखो सो रही सरकार।

सारे बह जाते अरमान

जो संजोया सो सामान

किंतु रहता कुछ सुरक्षित

वो है नेता का सम्मान

क्या आदमी क्या जानवर

सब जान बचाते भागकर

निश्चिंत नेता बैठते

उपर से एक बार झांककर

दो महीने की मार

देती बीस साल पिछाड़

देखो सो रही सरकार

देखो सो रही सरकार।

उन बेघरों पर आज

देखो गिरती कैसे गाज

न मुखिया जाता देखने

ना देता कोई अनाज

कट रहे हैं पुल

बह रहे हैं गांव

अस्तित्व की लड़ाई लड़ते

थक रहे हैं पांव

लाशों को देखा

नहीं मिलते कंधे चार

देखो सो रही सरकार

देखो सो रही सरकार।

नालो में हैं कचड़े

कचड़ों से नाला जाम

नगर निगम का देखो

है कैसा सोता काम

थोड़ी सी हो बारिश

चारो ओर पानी की धार

सड़कों पर हैं गड्ढे

और गड्ढों में है कार

इस जल प्रलय के कारण

है मचता हाहाकार

देखो सो रही सरकार

देखो सो रही सरकार।